Scientists: जानिये, अल्फ़्रेड मार्शल (Alfread Marshal) कोन थे? क्या था, अल्फ्रेड मार्शल् मांग का नियम (Alfred Marshall’s Law of Demand )!!

 

अल्फ्रेद् मार्शल कोन थे?(Alfread Marshal)
 

Alfred Marshall ; 26 जुलाई 1842 – 13 जुलाई 1924) इस समय के सबसे प्रभावशाली अर्थशास्त्री थे (economist)। उनकी ‘प्रिंसिपल्स ऑफ इकनॉमिक्स’ (principle of economics)(1890) अनेकों वर्षों तक इंग्लैण्ड ( England)में अर्थशास्त्र की पाठ्यपुस्तक के रूप में पढ़ायी जाती रही। इसमें मांग और आपूर्ति, मार्जिनल युटिलिटी (marginal utility) तथा उत्पादन लागत को व्यवस्थित रूप दिया। मार्शल (Marshal) की गणना के प्रमुख संस्थापकों में की जाती है।

जानिये उनके पुरे परिचय (introduction) के बारे मे:
 
अर्थशास्त्र(economics) को एक स्वतंत्र बौद्धिक अनुशासन के रूप में स्थापित करने का श्रेय अल्फ़्रेड मार्शल(alfread marshal) (1842-1924) को जाता है। 1885 से पहले अर्थशास्त्र एक विषय ( Economic subject) के रूप में दर्शनशास्त्र और इतिहास के पाठ्यक्रम का अंग हुआ करता था। इतिहासकार और दार्शनिक (historian and philosopher) अपनी डिग्री ,( Degree) लेने की मजबूरी में अध्ययन थे।

 

जाणीये, सन्दर्भ (context) के बारे मे:
1. पीटर ग्रोइनवेगन (1995)(pitter groinvegan), अ सोरिंग ईगल (a soaring eagle) : अल्फ़्रेड मार्शल 1842- 1924, एडवर्ड एल्गर (edward elgar), ब्रुकफ़ील्ड,(brukfild) वरमोंट.
2. मेनार्ड (menard 1924), मार्शल 1842-1924’, इकॉनॉमिक जर्नल (economic journal) 34 सितम्बर ( September).
3. डेविड रीज़मेन (David Reisman) (1990), द इकॉनॉमिक्स ऑफ़ अल्फ़्रेड मार्शल ( The Economics of Alfred Marshall), सेंट मार्टिंस प्रेस, Newyork
4. डेविड रीज़मेन (1990), अल्फ़्रेड मार्शल्स मिशन, सेंट मार्टिंस प्रेस(Martins Press), न्यूयॉर्क ( Newyork).
अल्फ्रेड मार्शल् मांग का नियम (Alfred Marshall’s Law of Demand)! !
 
 
सूक्ष्म अर्थशास्त्र(macro economics) मांग का नियम ( Law) कहता है कि, “सभी पहलुओं को बराबर रखते हुए , किसी वस्तु की कीमतों का गिरना (↓): उसकी मांग को बढ़ा देता है (↑); तथा किसी वस्तु की कीमतों का उठाना (↑)(upword) :उसकी मांग को गिरा देता है(↓)।”(downword दूसरे शब्दों में, मांग का कानून मूल्य(value) और मात्रा के बीच एक व्युत्क्रम संबंध का वर्णन करता है जो की किसी वस्तु के लिए होता है। वस्तु का दाम और उपभोक्ता की आय की कीमतों को स्थाई माना जाता है। हालांकि, मांग के कानून के कुछ संभावित अपवाद हैं, जैसे कि गिफ़ेन वस्तुएं और वीब्लेन वस्तुएं (Giffen goods and Veblen goods)।

 

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